| छत्रपती शिवाजीराजे भोसले |
छत्रपती
|
|
| छत्रपती शिवाजीराजे भोसले यांचे चित्र |
 |
| छत्रपती शिवाजीराजे भोसले यांची राजमुद्रा |
| अधिकारकाळ | जून ६, १६७४ - एप्रिल ३, १६८० |
| राज्याभिषेक | जून ६, १६७४ |
| राज्यव्याप्ती | पश्चिम महाराष्ट्र, कोकण,
सह्याद्री डॊंगररांगांपासून नागपूरपर्यंत
आणि
उत्तर महाराष्ट्र, खानदेशापासून
दक्षिण भारतात तंजावर पर्यंत |
| राजधानी | रायगड |
| पूर्ण नाव | शिवाजीराजे शहाजीराजे भोसले |
| पदव्या | गोब्राह्मणप्रतिपालक |
| जन्म | फेब्रुवारी १९१, १६३० |
| शिवनेरी किल्ला, पुणे |
| मृत्यू | एप्रिल ३, १६८० |
| रायगड |
| उत्तराधिकारी | छत्रपती संभाजीराजे भोसले |
| वडील | शहाजीराजे भोसले |
| आई | जिजाबाई |
| पत्नी | सईबाई,
सोयराबाई,
पुतळाबाई,
काशीबाई,
सकवारबाई |
| संतती | छत्रपती संभाजीराजे भोसले,
छत्रपती राजारामराजे भोसले |
| राजघराणे | भोसले |
| राजब्रीदवाक्य | 'प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववंदिता शाहसुनोः शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते।' |
| चलन | होन, शिवराई (सुवर्ण होन, रुप्य होन??) |
| १ - जन्मदिनांकाच्या निश्चितीबद्दल मतमतांतरे आहेत. |
ओळख
मराठी साम्राज्याचे संस्थापक आणि एक आदर्श शासनकर्ता म्हणून ओळखले जाणारे छत्रपती शिवाजीराजे भोसले एक सर्वसमावेशक, सहिष्णू राजा म्हणून महाराष्ट्रात आणि इतरत्रही वंदिले जातात. शत्रूविरुद्ध लढ्याकरता महाराष्ट्रातल्या डोंगर-दर्यांमधेअनुकूल असलेली गनिमी काव्याची पद्धत वापरून त्यांनी तत्कालीन विजापूरची आदिलशाही, अहमदनगरची निजामशाही आणि बलाढ्य मुघल साम्राज्यशाही ह्यांच्याशी लढा दिला, आणि मराठी साम्राज्याचे बीजारोपण केले. आदिलशाही, निजामशाही आणि मुघलसाम्राज्य बलाढ्य असली तरी महाराष्ट्रात त्यांची सगळी भिस्त स्थानिक सरदारांवर आणि किल्लेदारांवर होती. ते सरदार/किल्लेदार जनतेवर अन्याय-अत्याचार करत असत. शिवाजीमहाराजांनी त्या अन्याय-अत्याचारातून जनतेची सुटका केली, आणि उत्तम शासनाचे एक उदाहरण भावी राज्यकर्त्यांसमोर ठेवले.